सकारात्मक रूप से हो सोशल मीडिया का इस्तेमाल : राजेंदर कुमार

सोशल मीडिया का इस्तेमाल सकारत्मक रूप से होना चाहिए| यह एक बिना नियंत्रण का हथियार है इसका जितना अधिक प्रयोग समाज की भलाई में हो उतना ही बेहतर होगा यह विचार श्री राजेंदर कुमार-प्रचार प्रमुख विद्या भारती उत्तर क्षेत्र ने विद्या भारती हरियाणा द्वारा गीता सह शिक्षा माध्यमिक विद्यालय, थानेसर में आयजित दो दिवसीय (11 नवम्बर से 12 नवम्बर) प्रचार विभाग कार्यशाला में कहे|

श्री रवि कुमार जी-संगठन मंत्री विद्या हरियाणा द्वारा “विद्या भारती और प्रचार विभाग” का विषय रखते हुए बताया कि कैसे हम प्रचार के माध्यम से अपने विचार समाज तक पहुंचा सकते है| उन्होंने प्रचार के तीन माध्यम प्रिंट मिडिया, ई-मिडिया, सोशल मिडिया को विस्तारपूर्वक समझाते हुए कहा कि अपने विद्यालयों की सफलता जैसे खेलकूद, परीक्षा परिणाम, पूर्व छात्र, समाज प्रबोधन, पर्यावरण एवं जल सरक्षण गतिविधियाँ को समाज से अवगत करवाने में प्रचार सबसे शेष्ठ माध्यम है

श्री अजय सैनी-जन संचार एसोसिअट प्रोफेसर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ने प्रतिभागियों को फोटोग्राफी एवं वीडियोग्राफी के बारे में विस्तार से जानकारी दी| उन्होंने कहा की अख़बार में दी जाने वाली खबर में सबसे महत्त्वपूर्ण उसकी फोटो होती है अगर फोटोग्राफी अच्छी नहीं होगी तो अख़बार में खबर नहीं छपती है| इस कार्यशाला में विद्या भारती हरियाणा के विद्यालयों से प्रचार प्रमुख, पत्रिका संपादक एवं संवाददाता को मिलाकर कुल 22 प्रतिभागियों ने भाग लिया

 

 

नवीन प्रधानाचार्य कार्यशाला का हुआ समापन

प्रधानाचार्य विद्यालय का आधार होता है प्रधानाचार्य हिन्दुत्व एवं राष्टभक्ति की शिक्षा देने वाला होगा तो वहां का छात्र अवश्य ही निखर कर आएगा प्रधानाचार्य/आचार्यों को शिक्षित करने के लिए विद्या भारती समय-समय पर प्रयास करती रहती है| ऐसा एक प्रयास, विद्या भारती हरियाणा द्वारा दिनांक 29 सितम्बर से 02 अक्तूबर, 2019 को नवीन प्रधानाचार्य कार्यशाला का आयोजन कुरुक्षेत्र में किया गया|

उद्घाटन सत्र में श्री विजय नड्डा जी द्वारा विद्या भारती के बारे में बताया कि विद्या भारती कार्य क्या है, इसकी गतिविधियाँ एवं प्रक्रिया का विशलेषण किया| श्री शेषपाल जी-शैक्षिक प्रमुख विद्या भारती हरियाणा ने प्रधानाचार्य के कार्य एवं दायित्व को दो सत्रों में विस्तार से प्रधानाचार्य के सम्मुख रखा| श्री राम कुमार जी-प्रान्त प्रशिक्षण प्रमुख ने छात्र व प्रधानाचार्य दैनंदनी का उपयोग के बारे में विस्तार से चर्चा की गई| श्री हर्ष कुमार जी-सेवा शिक्षा प्रमुख विद्या भारती उत्तर क्षेत्र ने विद्यालय की वार्षिक योजना पर प्रकाश डाला|

श्री रवि कुमार जी-संगठन मंत्री विद्या भारती हरियाणा ने अपने सत्र में विद्यालय आधारित प्रशिक्षण, ICT in Education तथा स्वयं का विकास विषयों को प्रतिभागियों के सामने रखते हुए उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि आईसीटी के प्रति शिक्षकों का रवैया बहुत मायने रखता है| आज शिक्षा जगत की आवश्यकता है कि शिक्षा में तकनिकी का उपयोग किया जाए| विद्या  में अध्ययन, अध्यापन, समाज के साथ संवाद में तकनीक का उपयोग करने से शैक्षिणक स्तर बढ़ता है और बहुत सारे कार्यों में सरलता होती है| विद्यालय प्रबंधक में भी तकनीक आवश्यकता है, इससे गुणवत्ता बढ़ेगी| तकनीक उपयोग का प्रारंभ स्वय के करने से व रुचिं लेने से होगा| कार्यशाला में कुल 18 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया|

करणों के विकास के द्वारा ही व्यक्तितव का पूर्ण विकास किया जा सकता है: रवि कुमार

विद्यार्थी जीवन में प्राथमिक शिक्षा आधार है इसे कैसे प्रभावी बनाया जाए इस दृष्टि से विद्या भारती हरियाणा द्वारा 4 दिवसीय (17 से 20 सितम्बर, 2019) प्राथमिक प्रधानाचार्य एवं प्राथमिक विभाग प्रमुखों की कार्यशाला का आयोजन श्रीमद्भागवत गीता व. मा. विद्यालय, कुरुक्षेत्र में किया गया|

प्रथम सत्र में श्री शेषपाल जी ने प्रतिभागियों को संबोधन करते हुए क्रिया आधारित शिक्षण सम्बन्धी गतिविधियाँ (कविता “धरती गोल, अम्बर गोल”) करके दिखाई तथा उन्होंने अपने उद्बोधन में भारतीय मनोविज्ञान व पाश्चत्य मनोविज्ञान की तुलनात्मक व्याख्या करते हुए भारतीय शिक्षा व भारतीय संस्कृति के समायोजन पर विचार रखे| विद्यालायों में होने वाली वंदना का अभ्यास श्रीमती सविता जी-संगीत आचार्य गीता निकेतन आवासीय विद्यालय द्वारा करवाया गया| भाषा विकास का सत्र श्री सुभाष जी-सेवा क्षेत्र प्रमुख विद्या भारती हरियाणा ने लिया जिसमें उन्होंने भाषा का जीवन में महत्त्व का वर्णन करते हुए बताया कि भाषा विकास में उच्चारण और वर्तनी का विशेष महत्त्व होता है| उन्होंने सभी प्रतिभागियों को सुलेख और श्रुतलेख के माध्यम से भाषा के विकास को विभिन्न चरणों को सिखाया|

श्री रवि कुमार जी-संगठन मंत्री विद्या भारती हरियाणा ने अपने उद्बोधन में करणों के विकास पर विशेष बल देते हुए कहा कि पांच ज्ञानेन्द्रिया, पांच कर्मेन्द्रियाँ, मन, बुद्धि, चित और अहंकार का जीवन में विशेष महत्व है| करणों के सम्पूर्ण विकास के द्वारा ही व्यक्तितव का पूर्ण विकास किया जा सकता है|

21वीं सदी का बालक नई तकनीकों का ज्ञानी है परन्तु अभिभावक की शिक्षा 20वीं सदी में हुई है इस कारण आयु व ज्ञान के आधार पर एक अंतर बालक व अभिभावक में दिखाई देता है इस अंतर को कम करने के लिए अभिभावक प्रबोधन की आवश्यकता होती है

“बालक एवं अभिभावक काऊंसलिंग” का विषय श्री गौतम दत्त जी-BRC खंड शिक्षा कार्यालय द्वारा लिया गया| उन्होंने कहा कि वर्तमान युग में बालक एवं अभिभावक काऊंसलिंग अति आवश्यक है तथा इसका प्रत्येक आचार्यों को ज्ञान होना चाहिए ताकि बालक एवं अभिभावक की मन:स्थिति जानकर शिक्षा प्रदान की जा सके| उन्होंने दैनिक जीवन में आने वाली समस्याओं एवं समाधानों को उदाहरण सहित समझाया| श्री राम कुमार जी-प्रांत प्रशिक्षण प्रमुख विद्या भारती हरियाणा ने पञ्चकोषीय विकास का व्यक्तितव पर पड़ने वाले प्रभावों का वर्णन किया गया|

ART INTEGRATION EDUCATION से सम्बंधित जानकारी श्री रवि कुमार जी द्वारा गतिविधियों के माध्यम से दी गई कि कैसे कला, साहित्य व संगीत अन्य विषयों से सम्बंधित है| अन्य विषयों के शिक्षण में गतिविधियाँ करते हुए किस प्रकार ART INTEGRATION EDUCATION दी जा सकती है|

इसी प्रकार कार्यशाला में इसके अलावा Teaching Learning Material, Experiential Learning  गृह कार्य, प्रश्न पत्र निर्माण, कॉपी जाँच सम्बन्धी दैनिक कक्षाओं में आने वाली कठिनाइयों व समाधानों पर चर्चा हुई|

कार्यशाला के समापन सत्र में सभी प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साँझा किये| सभी प्रतिभागियों ने नवाचारों व विभिन्न गतिविधियों की सराहना की कहा कि एक नई ऊर्जा जो इस कार्यशाला से उन्हें प्राप्त हुई है विद्यालय कक्षा कक्ष में प्रयोग करेंगे| श्री अनिल कुलश्रेष्ठ ने अपने विचार रखते हुए कहा कि सतत प्रशिक्षण से उच्च स्तर का विकास होता है| हम अपने कार्यों को कुशलतापूर्वक कर सकते है| इस प्रकार के प्रशिक्षण वर्गों से स्वय के व्यक्तितव में निखार आता है|  इस कार्यशाला में 18 विद्यालयों के 20 आचार्य दीदी ने भाग लिया|

बालक के सर्वांगीण विकास में खेल का महत्वपूर्ण  योगदान होता है: अवधेश पाण्डेय

विद्या भारती के तत्वाधान में 32वां प्रांतीय खेलकूद प्रान्त स्तर पर चार स्थानों पर संपन्न हुआ खेलकूद जीवन का महत्वपूर्ण भाग है| बालक के सर्वांगीण विकास में खेल का महत्वपूर्ण  योगदान होता है विद्या भारती 1983 से खेलकूद प्रतियोगिताएँ प्रारंभ हुई| 2007 में विद्या भारती को SGFI से एक स्टेट के रूप में मान्यता मिली| SGFI में विद्या भारती के खिलाडियों का प्रदर्शन उत्कृष्ट हो रहा है| तीन विशेष अवार्ड SGFI से विद्या भारती को प्राप्त हुए है एक स्वछता पुरस्कार, दूसरा Fair Play Award,तीसरा Medal Upgration Award| हरियाणा में प्रतिवर्ष यह आयोजन जुलाई व अगस्त मास में विभिन्न स्थानों पर होते है| इस वर्ष यह आयोजन 23-25 जुलाई,2019  को हिन्दू वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय-नूंह में हुआ जहाँ खो-खो, शतरंज, योगासन, रस्साकसी की प्रतियोगिता हुई, 5-7 अगस्त को शिक्षा भारती व.मा. विद्यालय, गोहाना रोड रोहतक जहाँ कबड्डी, बैडमिंटन, हैंडबॉल, बॉक्सिंग आदि प्रतियोगिताएँ 10-12 अगस्त को गोपाल विद्या मंदिर व. मा. विद्यालय-जींद जहाँ एथेलेटिक्स, जुडो, कुश्ती एवं 17 अगस्त को श्रीमद्भागवत गीता व.मा. विद्यालय-कुरुक्षेत्र जहाँ फुटबॉल व ड्राप रो बॉल प्रतियोगिता का आयोजन हुआ | इन स्थानों पर विभिन्न विधाओं में 1475 भैया/बहनों ने भाग लिया | प्रान्त में सफल टीमें क्षेत्र व राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेगी| विद्या भारती खेल के साथ संस्कार निर्माण पर बल देती है

कुछ परिणाम इस प्रकार है:-

बैडमिंटन

बाल वर्ग भैया- गीता निकेतन आवासीय विद्यालय एवं बहिनें बिश्नामल जैन सरस्वती विद्या मंदिर, कालांवाली प्रथम रहे

किशोर वर्ग भैया- गीता निकेतन आवासीय विद्यालय एवं बहिनें शिक्षा भारती विद्यालय, रामनगर रोहतक प्रथम रहे

तरुण वर्ग भैया- गीता निकेतन आवासीय विद्यालय एवं बहिनें श्रीमद्भागवत् गीता व.मा. विद्यालय, नारायणगढ प्रथम रहे

फुटबॉल

बाल वर्ग भैया- गीता निकेतन आवासीय विद्यालय, कुरुक्षेत्र प्रथम रहे

किशोर वर्ग भैया- श्रीमद्भागवत गीता व मा. विद्यालय, कुरुक्षेत्र प्रथम रहे

तरुण वर्ग भैया- गीता निकेतन आवासीय विद्यालय एवं बहिनें गोपाल विद्या मंदिर व.मा. विद्यालय, जींद प्रथम रहे

बालिका के नैसर्गिक गुणों का विकास आवश्यक है: रेखा चुडासमा

बालिका के नैसर्गिक गुणों का विकास आवश्यक है| इस विकास के लिए विभिन्न उपक्रम विद्यालय व समाज में चलने चाहिए| उक्त शब्द सुश्री रेखा चुडासना-अ. भा बालिका शिक्षा संयोजिका ने विद्या भारती हरियाणा द्वारा आयोजित प्रांतीय कन्या भारती पदाधिकारी कार्यशाला (26 से 28 जुलाई,2019) को शिक्षा भारती विद्यालय रामनगर रोहतक में कहे| इस कार्यशाला में श्रीमती कुसुम जी-बालिका शिक्षा प्रमुख एवं श्रीमती निर्मल पोपली जी-सह बालिका विद्या भारती उत्तर क्षेत्र एवं श्रीमती सरोज सैनी जी-प्रान्त प्रभारी विशेष रूप से उपस्थित रही| इस कार्यशाला में राष्ट्र निर्माण में नारी की भूमिका, सांस्कृतिक परम्परा एवं आधुनिकता में समन्वय, नौकरी और पारिवारिक दायित्वों का ताल मेल, महिला की जीवन शैली में विज्ञान का महत्त्व, दायित्व बोध आदि विषयों पर विचार विमर्श एवं मार्गदर्शन हुआ|  योग, आत्म सुरक्षा, शारीरिक आदि विषय पर कार्यशाला में अभ्यास करवाया गया| कार्यशाला में प्रान्त भर से 18 विद्यालयों 94 बालिकाओ, 19 आचार्य दीदी ने भाग लिया|

भविष्य के विज्ञान के बारे में विज्ञानाचार्य जाने: रवि कुमार

भविष्य का विज्ञान कैसा है इसके बारे में विज्ञान आचार्यों को जानने की आवश्यकता है उक्त शब्द श्री रवि कुमार-संगठन मंत्री विद्या भारती हरियाणा ने ATL कार्यशाला 20 अगस्त , 2019 को संस्कृति भवन, गीता निकेतन परिसर कुरुक्षेत्र में कहे| उन्होंने कहा कि भविष्य का विज्ञान Digital, Robotics, Automation का है| यदि विज्ञान आचार्य इसे नहीं जानेगा तो वह बालक को सही दिशा नहीं दे सकेगा| ATL Lab भविष्य के विज्ञान को ध्यान में रखकर Design की गई है| इसका लाभ केवल बालकों के लिए ही नहीं आचार्यों के लिए भी है| इस कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य अटल टिंकरिंग प्रयोगशाला से जानकारी प्राप्त करना एवं सम्बंधित समस्याओं को सुलझाना था|

 

प्रथम सत्र में गीता निकेतन आवासीय विद्यालय, कुरुक्षेत्र की Project आचार्या श्रीमती गीता अरोडा ने अटल टिंकरिंक प्रयोगशाला को विस्तारपूर्वक बताया| इसके उपरांत प्रान्त कार्यकरिणी सदस्य माननीय श्री अश्वनी कुमार गुप्ता जी ने प्रान्त के ATL विद्यालयों के बारे में जानकारी ली|

कार्यशाला के दुसरे सत्र में डॉ. सी सी त्रिपाठी  (निर्देशक,यूं आई ई टी कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय) ने कहा कि अध्यापकों को विद्यार्थिओं का मार्गदर्शन समाज के लिए उपयोगी उपकरणों का निर्माण करने के लिए करना चाहिए| इस कार्यशाला में 14 विद्यालयों से 23 प्रतिनिधियों ने भाग लिया|

संस्कार केंद्र प्रवासी कार्यकर्त्ता कार्यशाला का हुआ समापन

दिनांक 13 व 14 जुलाई 2019 को कुरुक्षेत्र के संस्कृति भवन में विद्या भारती हरियाणा की सेवा शिक्षा के प्रवासी कार्यकर्ताओं की दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई।

ये सभी कार्यकर्त्ता संस्कार केंद्रों की सम्भाल करने वाले थे। इसका उद्घाटन उत्तर क्षेत्र के क्षेत्रीय सेवा शिक्षा व प्रशिक्षण प्रभारी श्री हर्ष कुमार जी ने किया। उन्होंने सेवा क्षेत्र की क्या होता है इस का क्या महत्व है व यहाँ कार्य करना क्यों आवश्यक है इन सब बातों पर चर्चा की व मार्गदर्शन किया।
दूसरे सत्र में उन्होंने संस्कार केंद्र की आवश्यकता व वहां की गतिविधियों के बारे में जानकारी दी। शाम के समय 4.30 से 6.30 बजे तक सभी कार्यकर्त्ता 3 वर्गों में 3 संस्कार केंद्रों पर गए तथा वहां होने वाले क्रियाकलापों को देखा,पूछताछ की व नई जानकारी दी। खेल कालांश में शिक्षा को पुष्ट करने वाले नए नए खेल खेले व लिख कर सबको दिए। रात्रि के समय श्री हर्ष जी के साथ संस्कार केंद्रों के अनुभव साँझा किए।

अगले दिन प्रातः प्रातः स्मरण व योग का अभ्यास किया गया। अगले सत्र में वंदना अभ्यास करवाया गया।
वंदना सत्र में प्रवासी कार्यकर्त्ता के करणीय कार्यों को श्री हर्ष जी द्वारा विस्तार से बताया गया। कार्यकर्त्ता के विकास के गुणों पर भी प्रकाश डाला गया।
दूसरे सत्र में विद्या भारती के माननीय प्रान्त संगठन मंत्री श्री रवि कुमार जी ने प्रवास की समग्र योजना व उसके अधिकतम क्रियान्वयन पर चर्चा की।
समापन सत्र में हिन्दू शिक्षा समिति के प्रांतीय अध्यक्ष श्री ऋषिराज वशिष्ठ जी ने ने सेवा शिक्षा व संस्कार केंद्र के महत्व को बताया तथा प्रवासी कार्यकर्ताओं से उत्साह पूर्वक इसमें कार्य करने का आह्वान किया। कल्याण मन्त्र के साथ इस 2 दिवसीय कार्यशाला का समापन हुआ।

अध्यापक की गुणवत्ता समाज , प्रशासन, व्यक्तिगत रूचि, प्रशिक्षण व शोध पर निर्भर करती है: भटनागर

विद्या भारती हरियाणा द्वारा संस्कृति भवन, गीता निकेतन आवासीय विद्यालय परिसर में अध्यापक की गुणवत्ता पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी के मुख्य वक्ता अवनीश भटनागर, राष्ट्रीय मंत्री, विद्या भारती ने कहा कि अध्यापक की गुणवत्ता समाज , प्रशासन, व्यक्तिगत रूचि, प्रशिक्षण व शोध पर निर्भर करती है। अच्छा शिक्षक वह होता है जो निरंतर अपना शिक्षण जारी रखता है। समाज शिक्षक पर विश्वास कर अपने बच्चों को उनके पास भेजता है। अध्यापक को भी उस विश्वास पर खरा उतरने का प्रयास करना चाहिए। अध्यापक को निरंतर प्रशिक्षण की जरूरत रहती है प्रशासन व प्रबंधन को उनके लिए इस तरह की व्यवस्थाएं करनी चाहिए। हम सब मिलकर समाज को एक गुणवत्तापूर्ण शिक्षक दे सकते हैं।
डॉ रामचंद्र , प्रोफेसर संस्कृत विभाग ने कहा कि एक चरित्रवान शिक्षक ही संस्कारवान शिक्षा दे सकता है। अध्यापक को निरंतर शोध व प्रशिक्षण से गुजरता रहना चाहिए। ऐसा करने से उसकी शिक्षण पद्धति में निखार आता है।
डॉ अनामिका ने सरकारी व निजी विद्यालयों के अंतर व निजी विद्यालयों के शिक्षकों पर रहने वाले दबाव को कम करने की वकालत की।
डॉ नीरज मित्तल, मित्तल पैथ लैब ने कहा कि भारत में स्कूली शिक्षा अन्य देशों से बेहतर है अगर हम उच्ततर शिक्षा मे सुधार ला सके तो भारत देश पूरी दुनिया में सिरमौर बन सकता है।
डॉ विवेक ललित ने कहा अच्छा शिक्षक वही हो सकता है जो अपने मन से इस कार्य में आता है। मजबूरी में बना अध्यापक कभी विद्यार्थियों के साथ न्याय नहीं कर सकता।
इनके अलावा क्रांति चावला, विकास गाबा, अर्चना शर्मा, रंजन शर्मी, कुशुम कौशल, विवेक शर्मा, महावीर भारद्वाज ने भी अपने विचार रखे।
डॉ पंकज शर्मा ने सभी अतिथियों का परिचय करवाया व संगोष्ठी समन्वयक की भूमिका निभाई।
डॉ चितरंजन कौशल ने सभी प्रतिभागियों का धन्यवाद किया।

परीक्षा परिणाम विद्यार्थी की उत्कृष्टता का पैमाना नही हो सकता – शिवकुमार

परीक्षा परिणाम किसी भी विद्यार्थी की सफलता का पैमाना नहीं हो सकता। विद्यार्थी को अपनी जीवन में अनेक शिक्षण , सामाजिक, व्यवसायिक परीक्षाओं से गुजरना पड़ता है। जो विद्यार्थी इन सबमें सफल होता है वही उत्कृष्ट बनता है। विद्यार्थियों को अपनी खूबीयों, कमियों, मौकों व जीवन में आने वाले खतरों को ध्यान में रखते हुए मेहनत करनी चाहिए। ये विचार आज शिवकुमार , राष्ट्रीय मंत्री, विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान ने उत्कृष्ट -2019  कार्यक्रम में रखे। कार्यक्रम का आयोजन पूर्व छात्र परिषद द्वारा आयोजित किया गया।

रवि कुमार, संगठन मंत्री हरियाणा ने कार्यक्रम की भूमिका रखते हुए कहा कि  सम्मान मिलने पर विद्यार्थी में आत्मविश्वास बढ़ता है तथा उनमें आगे बढ़ने का हौसला होता है।

पंकज गोस्वामी, निदेशक , जैब्रा टेक्नोलॉजी, यू के ने कहा कि बच्चों को अपना भविष्य बनाने के लिए जोखिम लेना चाहिए। उन्हें मिलने वाले मौको को बुनाते हुए आगे बढ़ना चाहिए।  उन्होंने सम्मानित हुए छात्रों को हमेशा अनुशासन में रहने का आह्वान किया।

डॉ पंकज शर्मा, प्रांत प्रमुख , पूर्व छात्र परिषद ने उपस्थित अतिथियों का परिचय करवाया तथा बताया कि परिषद हर वर्ष उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित करती है।

नवीन गोस्वामी ने विद्यार्थियों  को विभिन्न विषयों में दाखिला लेने बारे जानकारी सांझा करते हुए अनुसंधान व रक्षा के क्षेत्र में दाखिला लेने बारे बताया ।

बच्चों को शिक्षा एक अध्यापक बन कर नहीं एक आचार्य बन कर देनी चाहिए: अनायत

विद्यार्थी को शिक्षा के साथ साथ संस्कार भी आवश्यक हैं ताकि विद्यार्थी का सर्वंगीण विकास हो सके क्योंकि संस्कारवान शिक्षा मिलने पर विद्यार्थी का भविष्य उज्जवल बन सकता है और यह तभी संभव हो पायेगा जब आचार्यं प्रशिक्षित होगा | आचार्यों को प्रशिक्षित करने के लिए ही विद्या भारती हरियाणा के तत्वाधान में हिन्दू शिक्षा समिति के अंतर्गत 15 दिवसीय (1 से 15 जून, 2019) आचार्य विकास वर्ग का आयोजन गीता निकेतन आवासीय विद्यालय परिसर, कुरुक्षेत्र में हुआ जिसमें 20 विद्यालयों से 98 आचार्यों की प्रतिभागिता रही | वर्ग की दिनचर्या में प्रात: 5 बजे से रात्रि 10:00 बजे तक  शिक्षण-प्रशिक्षण की सभी गतिविधियों में जैसे योग, चर्चा, दिशाबोध, शिक्षण सत्र, शारीरिक व रात्रि के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में कालांश लिए गए

श्री सुरेन्द्र अत्री जी उपाध्यक्ष-विद्या भारती उत्तर क्षेत्र ने उद्घाटन सत्र में प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि समय के साथ चलने के लिए प्रशिक्षण आवश्यक है प्रशिक्षण वर्ग यानि की तपस्या और तपस्या मनोभाव से सफल होती है| वर्ग में शिक्षार्थी की भूमिका में रहकर सीखना सरल एवं सहज होता है वर्ग में उसी प्रकार का अनुशासन अपेक्षित होता है जैसा कि  विद्यालय में विद्यार्थी से| प्रशिक्षण वर्ग का विशेष अभिप्राय यही है कि मिलकर कार्य करने का स्वभाव और अच्छी आदतों का अभ्यास एवं कठिन बातों का सरलीकरण है छात्रों के गुणों को निरक्षण करके आगे बढ़ाना प्रशिक्षण से ही संभव है|

वर्ग में श्री विजय जी-प्रान्त प्रचारक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भी आए प्रतिभागियों का उद्बोधन देते हुए कहा कि प्रशिक्षण शिविर में शिक्षक अध्यापन के समय अलग-अलग विषयों पर केन्द्रित ज्ञान प्राप्त करता है, जिसके बिना प्रत्येक शिक्षक का विषय ज्ञान अधुरा है | अगर समय-समय पर उसका प्रशिक्षण होता रहे, तो वह अपने कार्यों में नया पन ला सकते है हर शिक्षण संस्थान द्वारा प्रिशिक्षण कार्यक्रम आयोजन करने चाहिए|

श्री अवनीश भटनागर जी, राष्ट्रीय मंत्री विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संसथान ने शिक्षा जगत में रही चुनौतियों एवं समाधान के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि आज शिक्षा क्षेत्र में ज्ञान के नए नए विस्फोट हो रहे है और अनेक प्रकार की चुनौतियों भी खड़ी हो रही है सरल से कठिन की ओर सिखने की प्रक्रिया जन्म से पूर्व ही प्रारंभ हो जाती है तथा जीवन पर्यन्त चलती है | सिखने की प्रक्रिया जहाँ से प्रारंभ होती है चुनौतियों भी वहीँ से शुरू होती है शिक्षा को केवल कक्षा कक्ष तक सिमित मान लेना सबसे बड़ी चुनौति है|

श्री रवि कुमार जी-संगठन मंत्री विद्या भारती हरियाणा ने आचार्य विकास वर्ग की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अध्यापन के समय एकाग्रता बहुत जरूरी है आचार्यों को कक्षा में विद्यार्थी की रुचि का ध्यान रखना चाहिए| शिक्षक में गुणात्मक विकास संभव है विद्यार्थियों को शिक्षित करने से पूर्व शिक्षक को भी अपने आप को सजग करना होगा|

सभी प्रतिभागियों अनौपचारिक शिक्षण के अंतर्गत सामाजिक संवेदन जागरण के लिए कुरुक्षेत्र नगर के आस-पास के क्षेत्र में सर्वेक्षण किया| ईंटो के भट्टे, संस्कार केंद्र, बस्तियों व ब्रह्मसरोवर पर साधु समाज पर जाकर नके जीवन, रहन सहन, आय साधन, शिक्षा व रोजगार आदि के विषय में सर्वे किया अपने विचार साँझा किये|

श्री पंजक शर्मा-पूर्व छात्र प्रमुख विद्या भारती हरियाणा ने भी प्रतिभागियों को पूर्व छात्रों को विद्या भारती की विशेष पूंजी बताते हुए पूर्व छात्र द्वारा प्रान्त किए जान वाले कार्यों का विश्लेषण किया एवं पूर्व छात्र से सम्बंधित पोर्टल VIDYABHARTIALUMNI.ORG पर पूर्व छात्रों के पंजीकरण के बारे में बताया| श्री संजय चौधरी-प्रचार प्रमुख विद्या भारती हरियाणा ने अपने विचार रखते हुए कहा की प्रचार किसी भी संगठन की विशेष शक्ति होती है जिससे वह अपने विचार अधिक से अधिक लोगो तक पहुंचा सकते है सोशल मिडिया पर सक्रीय और प्रान्त में चल रहे मीडिया हैंडल के बारे में बताया एवं विज्ञप्ति कैसे लिखना|  विद्या भारती हरियाणा प्रचार विभाग की ओर से छपने वाली पत्रिका “धेय्य चिंतन” एवं शिक्षा से शिक्षा से सम्बंधित सामग्री हेतु www. Rashtriyashiksha.com के बारे में बताया|

वर्ग का समापन 15 जून को किया गया जिसमें हिन्दु शिक्षा समिति में मुख्य अतिथि डॉ राजेन्द्र कुमार अनायत-कुलपति दिनबन्धु छोटूराम विश्वविद्यालय, सोनीपत ने कहा कि बच्चों को शिक्षा एक अध्यापक बन कर नहीं एक आचार्य बन कर देनी चाहिए| अध्यापक बनना सरल है लेकिन आचार्य बनना कठिन है| अध्यापक केवल कक्षा को पढ़ाता है और आचार्य बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ आचरण, संस्कार भी सिखाता है| हमारा प्रयास होना चाहिए कि हम एक अच्छे आचार्य बने| अभिभावक अपने बच्चों को विद्यालय एक विश्वास के साथ भेजता है की वहां बच्चों का सर्वांगीण विकास होगा हमें उनके विश्वास पर खरा उतरकर दिखाना है