करणों के विकास के द्वारा ही व्यक्तितव का पूर्ण विकास किया जा सकता है: रवि कुमार

विद्यार्थी जीवन में प्राथमिक शिक्षा आधार है इसे कैसे प्रभावी बनाया जाए इस दृष्टि से विद्या भारती हरियाणा द्वारा 4 दिवसीय (17 से 20 सितम्बर, 2019) प्राथमिक प्रधानाचार्य एवं प्राथमिक विभाग प्रमुखों की कार्यशाला का आयोजन श्रीमद्भागवत गीता व. मा. विद्यालय, कुरुक्षेत्र में किया गया|

प्रथम सत्र में श्री शेषपाल जी ने प्रतिभागियों को संबोधन करते हुए क्रिया आधारित शिक्षण सम्बन्धी गतिविधियाँ (कविता “धरती गोल, अम्बर गोल”) करके दिखाई तथा उन्होंने अपने उद्बोधन में भारतीय मनोविज्ञान व पाश्चत्य मनोविज्ञान की तुलनात्मक व्याख्या करते हुए भारतीय शिक्षा व भारतीय संस्कृति के समायोजन पर विचार रखे| विद्यालायों में होने वाली वंदना का अभ्यास श्रीमती सविता जी-संगीत आचार्य गीता निकेतन आवासीय विद्यालय द्वारा करवाया गया| भाषा विकास का सत्र श्री सुभाष जी-सेवा क्षेत्र प्रमुख विद्या भारती हरियाणा ने लिया जिसमें उन्होंने भाषा का जीवन में महत्त्व का वर्णन करते हुए बताया कि भाषा विकास में उच्चारण और वर्तनी का विशेष महत्त्व होता है| उन्होंने सभी प्रतिभागियों को सुलेख और श्रुतलेख के माध्यम से भाषा के विकास को विभिन्न चरणों को सिखाया|

श्री रवि कुमार जी-संगठन मंत्री विद्या भारती हरियाणा ने अपने उद्बोधन में करणों के विकास पर विशेष बल देते हुए कहा कि पांच ज्ञानेन्द्रिया, पांच कर्मेन्द्रियाँ, मन, बुद्धि, चित और अहंकार का जीवन में विशेष महत्व है| करणों के सम्पूर्ण विकास के द्वारा ही व्यक्तितव का पूर्ण विकास किया जा सकता है|

21वीं सदी का बालक नई तकनीकों का ज्ञानी है परन्तु अभिभावक की शिक्षा 20वीं सदी में हुई है इस कारण आयु व ज्ञान के आधार पर एक अंतर बालक व अभिभावक में दिखाई देता है इस अंतर को कम करने के लिए अभिभावक प्रबोधन की आवश्यकता होती है

“बालक एवं अभिभावक काऊंसलिंग” का विषय श्री गौतम दत्त जी-BRC खंड शिक्षा कार्यालय द्वारा लिया गया| उन्होंने कहा कि वर्तमान युग में बालक एवं अभिभावक काऊंसलिंग अति आवश्यक है तथा इसका प्रत्येक आचार्यों को ज्ञान होना चाहिए ताकि बालक एवं अभिभावक की मन:स्थिति जानकर शिक्षा प्रदान की जा सके| उन्होंने दैनिक जीवन में आने वाली समस्याओं एवं समाधानों को उदाहरण सहित समझाया| श्री राम कुमार जी-प्रांत प्रशिक्षण प्रमुख विद्या भारती हरियाणा ने पञ्चकोषीय विकास का व्यक्तितव पर पड़ने वाले प्रभावों का वर्णन किया गया|

ART INTEGRATION EDUCATION से सम्बंधित जानकारी श्री रवि कुमार जी द्वारा गतिविधियों के माध्यम से दी गई कि कैसे कला, साहित्य व संगीत अन्य विषयों से सम्बंधित है| अन्य विषयों के शिक्षण में गतिविधियाँ करते हुए किस प्रकार ART INTEGRATION EDUCATION दी जा सकती है|

इसी प्रकार कार्यशाला में इसके अलावा Teaching Learning Material, Experiential Learning  गृह कार्य, प्रश्न पत्र निर्माण, कॉपी जाँच सम्बन्धी दैनिक कक्षाओं में आने वाली कठिनाइयों व समाधानों पर चर्चा हुई|

कार्यशाला के समापन सत्र में सभी प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साँझा किये| सभी प्रतिभागियों ने नवाचारों व विभिन्न गतिविधियों की सराहना की कहा कि एक नई ऊर्जा जो इस कार्यशाला से उन्हें प्राप्त हुई है विद्यालय कक्षा कक्ष में प्रयोग करेंगे| श्री अनिल कुलश्रेष्ठ ने अपने विचार रखते हुए कहा कि सतत प्रशिक्षण से उच्च स्तर का विकास होता है| हम अपने कार्यों को कुशलतापूर्वक कर सकते है| इस प्रकार के प्रशिक्षण वर्गों से स्वय के व्यक्तितव में निखार आता है|  इस कार्यशाला में 18 विद्यालयों के 20 आचार्य दीदी ने भाग लिया|

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