व्यक्तित्व विकास के लिए शिशु वाटिका के शिक्षण पर दें ध्यान : रवि कुमार

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आज सम्पूर्ण विश्व में covid-19 वश्विक महामारी के कारण सबसे अधिक शिक्षा क्षेत्र प्रभावित हुआ है । इस समय में कुछ विशेष प्रयोग भी हुए है और कुछ कठिनाइयाँ भी सामने आई है जैसे: मोहल्ला पाठशालाएं, बच्चों के यूट्यूब चैनल, शारीरिक व संगीत को ई लर्निंग में जोड़ा, विद्यालय द्वारा प्रातःकालीन 7:00 बजे के सत्र में 70-80% बच्चों के साथ अभिभावकों का जुड़ना, ऑनलाइन Class में चित्राधारित कहानी, हर शनिवार नैतिक शिक्षा, जूम क्लासेज शिक्षण, अभिभावक संपर्क व काम न करने वालों से संपर्क . ऑनलाइन टेस्ट , गीत कक्षा , माताओं का प्रशिक्षण, आईसीटी का प्रयोग नहीं करने वालों के  घर-घर जाकर हाथ से काम करवाया है आदि विशेष प्रयोग हुए एवं कुछ कठिनाइयाँ भी सामने आई जैसे : ई लर्निंग संसाधनों की कमी, मोबाइल दुरुपयोग ज्यादा हो रहा है, मेडिकल की समस्या- माइग्रेन- सिरदर्द, डाटा मैनेजमेंट की समस्या, कापियां  बनाने की समस्या, पढ़ने में बच्चे कमजोर हैं आदि, ये विचार श्री रवि कुमार जी-प्रान्त संगठन मंत्री विद्या भारती हरियाणा द्वारा एक दिवसीय ऑनलाइन प्रांतीय प्रधानाचार्य बैठक (10 जुलाई 2019) ने रखे साथ ही उन्होंने प्रधानाचार्यों से  व्यक्तित्व विकास के लिए शिशु वाटिका के  शिक्षण पर ध्यान, स्क्रीन टाइम न बढ़े, माताओं का प्रशिक्षण- उन्हें  वीडियो भेजें, शिशु से दूसरी कक्षा तक कक्षा अनुसार घर में उपलब्ध सामग्री का प्रयोग करते हुए माताओं का प्रशिक्षण हो, बच्चों को साथ में बुलाना, भाषा गणित पर बल हो आदि  विषयों पर चर्चा की।

कक्षा अनुसार अभिभावक प्रबोधन होना चाहिए जिसमे व्यवहार संबंधी बात होनी चाहिए । जिन कक्षाओं के छात्रों के स्मार्टफोन नहीं है ऐसे छात्रों का डाटा तैयार करना और यह विचार करना कि इनके लिए क्या कर सकते है ?  रवि कुमार जी ने प्रधानाचार्यों  विद्यालय खुलने पर हमारी तैयारी कैसी हो पर भी  चर्चा की।

माननीय सुरेन्द्र अत्री जी-उपाध्यक्ष विद्या भारती उत्तर क्षेत्र ने अपने विचार रखते हुए कहा कि संगठन में लक्ष्य अनुरुप कार्य के लिए आर्थिक पारदर्शिता आवश्यक है । अभिभावक की आय में कमी, छात्र विद्यालय में नहीं आ रहा, परिवार की कठिनाई को मिलकर दूर करने हैं । आय का स्रोत शुल्क व अन्य साधन (मान धन की व्यवस्था ) हैं इसके लिए और क्या किया जा सकता है विषय पर चर्चा की।

माननीय विजय नड्डा जी-संगठन मंत्री विद्या भारती उत्तर क्षेत्र ने अपने उद्बोधन में कहा कि प्रधानाचार्य के नाते संस्थान का नेतृत्व का दायित्व हमारे ऊपर है । ऑनलाइन लर्निंग में सभी अपनी पकड़ बना ले । इसके लिए निरंतर प्रशिक्षण आवश्यक है । प्रत्यक्ष कक्षा के बाद भी ऑनलाइन शिक्षा जारी रहेगी । कोविड-19 में ज्ञान के  भंडार की तरफ आकर्षण बढ़ा है । यूट्यूब व अन्य स्रोतों से नजदीकी बनी है ।  उन्होंने कहा कि आर्थिक मोर्चे पर भी मक्षम ,समर्थ लोगों, प्रबंध समिति, पूर्व छात्रों का सहयोग ले । सामान्य होने पर भी समाज को विद्यालय के साथ जोड़ना । अच्छे आचार्यों को अच्छा वेतन दे । समाज की सज्जन व सक्षम शक्ति, पूर्व छात्रों को साथ लेकर सक्षम आर्थिक तंत्र खड़ा करना  पड़ेगा।  कोविड-19 में सावधानी की आवश्यकता है । स्थाई विषयों की तरफ ध्यान देना पड़ेगा । सभी के लिए योग कक्षा, काउंसलिंग की व्यवस्था बने ।  इस काल खंड में अनेक प्रकार की हानियां हुई हैं। -मानसिक उत्साह के लिए  प्रयास और प्रयोग करते रहने चाहिए ।  शिशु वाटिका विद्यालय की नींव  है, इसमें लगे आचार्यों को  हटाए नहीं, मनोबल बढ़ाएं ।  शिशु वाटिका प्राथमिकता का केंद्र हो । चयन पर ध्यान करना, आधुनिक संसाधन जुटाना । हमारी टोली खड़ी हो, टोली के बल पर काम चलाएं । टोली का प्रशिक्षण निरंतर रहे। कहीं पर भी जाए,काम सफर न करें । सक्रिय  व सक्षम टोली, उसका प्रशिक्षण हो ।  Skill Education के लिए  आचार्य व बच्चों की Skill Mapping हो । आचार्य  में पढ़ाने के अलावा अन्य कौशल भी हो ।  डिग्री के बिना किस कौशल से जीवन जी सकते हैं ? अभिरुचि /रुचि का विषय  बने । कौशल विकास में कैसे आगे बढ़े । घर के बिना सहयोग के काम करते हुए पढ़ाई करना । आत्मविश्वास व प्रसन्नता बढ़े । 

इस बैठक में प्रधानाचार्यों द्वारा जिज्ञासा का समाधान किया गया एवं एक बैठक में 55 प्रधानाचार्यों ने प्रतिभागिता की ।

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