पाठक वर्ग को ध्यान में रखकर सरल भाषा में लिखना चाहिए : आशुतोष भटनागर

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समाचार पत्र, पत्रिका पढ़ना भी एक कला है जैसे सूचनाएं लेने के लिए पढ़ते हैं वैसे ही नवीनता ढूंढने के लिए भी पढ़ना चाहिए। परन्तु यह कार्य तभी संभव होगा जब लेखक में लिखने की कला होगी। इसी उद्धेश्य से विद्या भारती हरियाणा ने प्रान्त द्वारा प्रकाशित होने वाली पत्रिका ‘ध्येय चिंतन’ के लेखकों की ऑनलाइन कार्यशाला (5 दिसम्बर 2020) का आयोजन किया गया। जिसमे श्री आशुतोष भटनागर निदेशक जम्मू कश्मीर अध्यन केंद्र दिल्ली ने अपने विचार रखते हुए कहा कि लेखक को लेख लिखते समय संस्थान की शब्दावली एवं शब्द सीमा को ध्यान में रख  विषय की विशेषज्ञता रखनी चाहिए। भाषा शैली किसी भी पत्र, पत्रिका,अखबार की निजी होती है । एक लेख में एक ही विषय होना चाहिए एवं पाठक वर्ग को ध्यान में रखकर सरल भाषा में लिखना चाहिए ।

उन्होंने कहा कि संपादकीय नीति एवं विक्रय नीति अलग-अलग होती हैं। हमें अपनी सामग्री अपने मूल्यों के अनुसार रखनी चाहिए।  समसामयिक विषयों को ध्यान में रखते हुए समय पर ही लिखना चाहिए। जानकारी अधिक हो सकती है परंतु तर्कपूर्ण तरीके से अपनी बात रखनी चाहिए। बिटवीन द लाइन भी बहुत कुछ होता है उसके निहितार्थ को समझना चाहिए, जो नहीं लिखा वह पढ़ना और उसे लिखना भी एक कला है। हम ही लिखते हैं हम ही पढ़ते हैं परंतु इससे बाहर भी जाना चाहिए । आधुनिक माध्यमों का प्रयोग करना चाहिए। थोड़ा-थोड़ा करके निरंतर लिखना चाहिए । प्रतिदिन लिखने का अभ्यास करना चाहिए अधिक नहीं तो साप्ताहिक लिखने का प्रयास रहना ही चाहिए । इंटरनेट की सामग्री पर पूर्ण विश्वास नहीं करना चाहिए सत्यता जांच लेनी चाहिए।

लेख का एक फॉर्मेट होता है, शीर्षक विषय को बताने आकर्षक एवं रोचक वाला होना चाहिए। विषय यदि नीरस होता है तो व्यक्ति पड़ेगा नहीं INTRO संक्षेप में होना चाहिए जो पूर्ण विषय को कहता हो। 25 से 30 शब्दों में क्या? क्यों? कैसे ?कब? कहां? इन पंच ककारों का उत्तर आ जाना चाहिए। पैराग्राफ तथा शब्द बड़े ना हो ,कठिन ना हो ,लेख को समझने के लिए शब्दकोश की आवश्यकता ना पड़े । अंत में निष्कर्ष होना चाहिए ,परीक्षा के तरीके से नहीं पाठक के तरीके से लिखना चाहिए ।

आवश्यकता है अपना अध्ययन बढ़ाना, अपना विषय तय करना और उस विषय की एक टोली बनाना ताकि विषय में निपुणता आ सके । आपस में एक दूसरे की सहायता करके लेखों को ठीक करना चाहिए । विषय चयन के समय भविष्य की दृष्टि रखनी चाहिए अनुमानित विषय को ध्यान में रखते हुए लेख तैयार करना चाहिए जैसे 15 अगस्त 2021 को स्वाधीनता के 75 वर्ष पूर्ण हो जाएंगे और आगामी 2 वर्ष तक यही विषय चलेगा।

डॉ कुलदीप मेहंदीरत्ता प्रोफ़ेसर चौधरी बंसी लाल विश्वविद्यालय एवं सदस्य प्रान्त कार्यकारिणी ने भाषा, सामग्री संकलन में इन्टरनेट का उपयोग तथा ध्यातव्य बिन्दू पर अपना विषय रखा। उन्होंने लेख के उद्धेश्य एवं विषयों को समझाया। इसके साथ ही लेखन से पहले विचारणीय बिन्दू जैसे लिखने का उद्देश्य निर्धारण – क्यों?,  लक्षित पाठक वर्ग, विषय-सामग्री एवं लेख की संरचना आदि और लेखन की प्रक्रिया में विषय का चयन, लक्षित पाठक वर्ग, शीर्षक, शोध द्वारा सामग्री का संकलन, स्रोत, रुपरेखा, सामग्री का चयन, पहला ड्राफ्ट (विवरण, उदाहरण, तर्क- प्रारम्भ व अंत में, समस्या, संभावित विरोधी तर्क व अन्तर्विरोध, अंत में समाधान), दोहराना, प्रुफ तथा भाषा एवं अशुद्धियाँ सही करना आदि पर विशेष ध्यान दिया। इस कार्यशाला में कुल 22 लेखकों ने भाग लिया

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